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अवचेतन मन को कैसे जगाये, अवचेतन मन की शक्ति

अवचेतन मन को कैसे जगाये – आपने एक फिल्म का ये डायलॉग तो ज़रूर सुना होगा कि – “अगर किसी चीज़ को पूरी शिद्दत से चाहो, तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की साजिश करती है।” दरअसल ये कायनात जो आपके सपनों को साकार करती है, ये आप ही के अंदर मौजूद है और ये है आपका अवचेतन मन। हमारे दिमाग के दो हिस्से होते हैं जिन्हें चेतन मन और अवचेतन मन कहा जाता है। जहाँ चेतन मन हमारी सक्रिय अवस्था है जिसमें हम सोच-विचार और तर्क के आधार पर किसी भी कार्य को करने का निर्णय लेते हैं वहीँ अवचेतन मन उस कमरे के समान है जहाँ हमारे सारे विचार, अनुभव और मान्यताएं जमा रहती हैं।

दिमाग के इन दोनों हिस्सों के अंतर को समझने के लिए आप साइकिल चलाने का उदाहरण ले सकते हैं, पहली बार साइकिल चलाते समय आपने जो सावधानियां रखी होंगी और साइकिल पर बैलेंस बनाते समय जब डर महसूस किया होगा, उस समय आप अपना चेतन मन काम में ले रहे थे लेकिन जब अभ्यास करने के बाद आप साइकिल चलाने में माहिर हो गए, तब आपको साइकिल चलाने में न डर लगा, न ही साइकिल का बैलेंस बनाने में कोई मुश्किल आयी, क्योंकि अभ्यास के दौरान साइकिल चलाने के ये अनुभव आपके अवचेतन मन में स्टोर होते चले गए और फिर आपके अवचेतन मन ने चेतन मन का स्थान ले लिया और साइकिल चलाना आपके लिए बेहद आसान काम बन गया।

हमारे रोज़मर्रा के कामों को करने में अवचेतन मन काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और शरीर में होने वाली सभी स्वचालित गतिविधियां जैसे सांस लेना और दिल का धड़कना भी इसी के द्वारा होता है। अवचेतन मन को आप रोबोट मान सकते हैं जिसकी प्रोग्रामिंग चेतन मन द्वारा की जाती है और जो स्वयं कुछ अच्छा-बुरा सोच नहीं सकता, बल्कि चेतन मन द्वारा की गयी प्रोग्रामिंग के अनुसार स्वचालित तरीके से कार्य करता रहता है| इसका अर्थ ये हुआ कि अगर हम चाहे तो अपने अवचेतन मन में वो सभी बातें डाल सकते है जिन्हें हम सच होता हुआ देखना चाहते हैं।

जैसे कंप्यूटर को दिए गए निर्देशों के अनुसार ही कंप्यूटर काम करता है, बिल्कुल वैसे ही अवचेतन मन की मनचाही प्रोग्रामिंग करके मनचाहे परिणाम पाए जा सकते हैं। चेतन मन को विचारों का गेटकीपर कहा जा सकता है, जो ये निर्णय लेता है कि अवचेतन मन में किन विचारों को जाने दिया जाये और किन विचारों को अवचेतन मन में जाने से रोका जाए क्योंकि बार बार दोहराया गया विचार अवचेतन मन में स्थायी हो जाता है और हमारा ये अवचेतन मन उसे सच करने में जुट जाता है, वो विचार सही हो या गलत, इससे अवचेतन मन अप्रभावित रहता है।

ब्रह्माण्ड का सबसे बड़ा ट्रांसमीटर है हमारा अवचेतन मन और इसी के कारण टेलीपैथी भी संभव हो पाती है। अवचेतन मन की अपार और असीमित शक्तियों के कारण ही दुनिया में इतने महान आविष्कार और खोजें संभव हो सकी है और चौंकाने वाली बात ये है कि ये अपार शक्ति का स्रोत हर इंसान के पास है।

अवचेतन मन को जगाना बेहद आसान है, बस इसके लिए आपको शुरुआत में अपने विचारों को संयमित करना होगा और विचारों की सकारात्मकता के प्रति सजग बने रहना होगा, बिल्कुल उसी तरह जिस तरह आप पहली बार साइकिल चलाते समय सजग और सावधान बने रहे थे क्योंकि आप जानते थे कि ज़रा सा ध्यान हटा तो आप साइकिल से गिर जाएंगे और आपको चोट लग जायेगी, बिलकुल इसी तरह आपके विचारों में ज़रा सी भी नकारात्मकता आने लगी तो आपके यही विचार अवचेतन मन में स्थायी हो जायेंगे और आपका अवचेतन मन इन्हें सच करने में जुट जाएगा और इन निगेटिव विचारों के परिणाम अच्छे नहीं निकलेंगे, ये तो आप समझ ही गए हैं इसलिए अभी से अपने विचारों की निगरानी करना शुरू कर दीजिये।

आइये, अब जानते हैं अवचेतन मन को कैसे जगाये और अवचेतन मन को जगाने से जुड़े 2 नियम–

पहला नियम – कोई भी बात या कार्य दोहराते रहने से, अवचेतन मन का हिस्सा बन जाता है। इसका अर्थ ये हुआ कि आप अपने जीवन में जिस तरह के सुधार या बदलाव चाहते हैं, जिस स्तर की सफलता हासिल करना चाहते हैं और जिस तरह के सामर्थ्य और क्षमता की अपेक्षा खुद से करते हैं, उन्हें अपने मन में दोहराते रहिये और ऐसा करते समय ध्यान रखिये कि शक्तिशाली विचार ही अवचेतन मन में अपनी जगह बना सकता है इसलिए विचार का दृढ़ होना बेहद ज़रूरी है और पूरे यकीन के साथ स्पष्ट तरीके से दोहराया गया विचार निश्चित रूप से सच का रूप ले लेगा क्योंकि ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जिसे पूरा करना अवचेतन मन की सामर्थ्य से बाहर हो। इसके अलावा उन विचारों का वर्तमान काल में दोहराया जाना भी ज़रूरी है।

दूसरा नियम – अवचेतन मन सच और कल्पना में अंतर करना नहीं जानता और इसका अर्थ ये हुआ कि भले ही कोई कार्य आपको असंभव लगता हो लेकिन अगर आप उसे सही तरीके से दोहराते रहेंगे तो आपका ये शक्तिशाली अवचेतन मन उसे सच में बदल देगा क्योंकि सच और कल्पना का अंतर हम जानते हैं लेकिन हमारा अवचेतन मन नहीं जानता। वो वही करेगा जो आप उसे करने के लिए कहेंगे। इसके लिए आपके विचारों का सकारात्मक रूप में कहा जाना भी बेहद ज़रूरी है क्योंकि अवचेतन मन नकारात्मक विचारों को नहीं समझता।

मान लीजिये, कि आप हर दिन सुबह जल्दी उठना चाहते हैं और इसके लिए आप इस विचार को लगातार दोहराते हैं कि – ‘मैं हर दिन देर से नहीं उठना चाहता’, तो ऐसा कहकर आप खुद के लिए मुश्किल खड़ी कर लेंगे क्योंकि अवचेतन मन में पहुंचाया गया ये विचार नकारात्मक है और इसके परिणामस्वरुप आप हर दिन देर से ही उठेंगे। “नहीं” शब्द का इस्तेमाल करने से बचिए, केवल सरल शब्दों में कहिये – ‘मैं रोज़ाना जल्दी उठता हूँ।’ अगर आप गौर करें, तो ये वाक्य सकारात्मक भी है और वर्तमान काल में भी कहा गया है, ऐसे में पूरी दृढ़ता के साथ इसे दोहराने से आपको इच्छित परिणाम बहुत जल्द मिलने लगेंगे और आप अपने आप ही रोज़ाना जल्दी उठने लगेंगे।

इस तरह दोहराव करके आप अपने जीवन को एक बेहतर और संतुष्ट जीवन में बदल सकते हैं। आप चाहे तो रोज़ाना इन विचारों का दोहराव करके स्वयं के साथ-साथ दुनिया का हित भी कर सकते हैं। इसके लिए आप अपने मन में इन बातों को दोहराते रहिये-

मैं खुश हूँ, मैं स्वस्थ हूँ, मैं सफल हूँ, मैं आत्मविश्वास से परिपूर्ण हूँ, मैं अपने जीवन से संतुष्ट हूँ,
ये जीवन सरल है, हर सांस के साथ सकारात्मकता मेरे अंदर प्रवेश कर रही है, मैं आशावादी हूँ,
मेरे अंदर सभी के लिए प्रेम की भावना है।
मेरे आसपास का माहौल खुशनुमा हैं, मेरे परिवार में सभी स्वस्थ है, सभी प्रसन्न हैं।
दुनिया में सभी स्वस्थ है, प्रसन्न है, पूरी दुनिया में शान्ति है, सौहार्द है, प्रेम है।

अब तो आप जान ही गए हैं कि अवचेतन मन को जगाना कितना सरल कार्य है। बस इसके लिए मन की स्थिरता और अपने द्वारा किये गए दोहराव में यकीन रखना ज़रूरी है और अगर अभी भी आपको अवचेतन मन की शक्ति पर यकीन न हुआ हो तो ज़रा वो घटनाएं याद कर लीजिये जब आपने कहा हो कि- कोई अनहोनी ना हो जाए, तो कोई अनहोनी जरूर हुयी होगी और किसी को लगातार याद करते रहने पर उस व्यक्ति से अचानक मिलना या बात होना, ये सब कोई चमत्कार नहीं है, बस आपके अवचेतन मन द्वारा किये गए वो कार्य है जिनका दोहराव आपने बार-बार किया हो। तो बस, अब से सिर्फ अच्छा सोचिये और अच्छा पाइये क्योंकि ये ताकत तो आपके अंदर ही छिपी है ना।

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